Sunday, June 4, 2017

न ही मैं, खुद को समझा पाया हूँ ..

और हो सकता है
कि,
किसी सुबह
 तुमसे मुलाकात ही
न हों !
मैंने दुनिया को
सोचना छोड़ दिया है
जबकि,
मैं जानता हूँ
कि यह, वही दुनिया है
जहाँ से निकल कर
मैं लेना चाहता हूँ साँस !
न तुमने समझा मुझे
न ही
मैं, खुद को समझा पाया हूँ ....
तुम्हारे गुड नाईट
कहने के बाद के समय को
मैं सोचता हूँ ...
तुम समझ नहीं सकी हो मुझे
मैं,
अपनी तमाम रातें
तुम्हारे नाम करता हूँ |

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