Saturday, January 16, 2016

लौट कर मुझे तुम तक आना है

और आज फिर गीली हुई
तुम्हारी पलकें
विदा लेते हुए तुमने गले से लगा लिया मुझे
मैंने स्थगित कर दी
आज की यात्रा फिर
आज पहली बार नहीं हुआ
कि मुझे रुकना पड़ा
छोड़नी पड़ी अपनी यात्रा
दरअसल तुम समझे नहीं
कि मेरी हर यात्रा का अंतिम पड़ाव
तुम ही हो
लौट कर मुझे
तुम तक आना है |

Thursday, January 14, 2016

मेरे दर्द को तुमने कविता बना दिया

दरअसल मैंने
दर्द लिखा हर बार
जिसे तुमने मान लिया
कविता |
मेरे दर्द को 
तुमने कविता बना दिया !
-तुम्हारा कवि

Friday, January 8, 2016

कुछ लघु कविताएँ



1. उफ़नती  नदी  का  दर्द

और तुम्हारे आंसूओं ने
बता दिया
उफ़नती नदी का दर्द
-तुम्हारा कवि 

2.कमजोर आदमी का दावा

मेरा यकीन था
या भ्रम
कि करता रहा दावा 
तुम्हें जानने का !
यह भरोसा अपने भीतर छिपे 
उस कमजोर आदमी का दावा था,
जो खुद को जान नहीं पाया
आज तक .......!

3.मेरा वर्ग

चेहरा,
रंग,
और तन के कपड़े 
से तय किया उन्होंने
मेरा वर्ग !
किसी ने
गौर नहीं किया
मेरी भाषा पर !

4.देशद्रोही

और इस तरह 
मैं बन गया गुनाहगार 
कि दोस्ती के नाम पर 
नहीं दिया मैंने 
तुम्हारे गुनाहों में साथ
तुम्हारे
झूठ को नहीं माना
रिश्तों के नाम पर
मैंने वही कहा हर जगह
जो सत्य था मेरे लिए
और अंत में
मैं बन गया
देशद्रोही !



Wednesday, January 6, 2016

ये आदत कभी न छूटे

तुम्हारे गुस्से को
मैंने सेव कर लिया है
दिल के हार्ड डिस्क में
और गुस्से में कही गयी तुम्हारी मीठी बातों को
मैंने टंकित कर लिया है
अपनी कविता की डायरी में
ताकि पढ़ सकूं उन्हें
उनदिनों में,
जब गुस्साने की आदत छूट जाएगी तुम्हारी |
पर मैं चाहता हूँ
कि ये आदत कभी न छूटे
क्योंकि गुस्सा शांत होने पर
तुम्हें बहुत प्यार आता है मुझ पर |
-तुम्हारा कवि

वक्त हम पर हँस रहा है

हादसों के इस दौर में जब हमें गंभीर होने की जरूरत है हम लगातर हँस रहे हैं ! हम किस पर हँस रहे हैं क्यों हंस रहे हैं किसी को नहीं पता दरअस...