Wednesday, July 20, 2011

साईकिल वाला लड़का कौन है ?

वह साईकिल वाला लड़का 
कौन है 
जो हर शाम तुम्हारी गली में आकर 
तुम्हारे घर के नीचे 
लगाता है चक्कर ?
मत कहो कि --
तुम नही जानती हो उसे 
कभी नही देखा आज से पहले उसे 
ठीक सूरज ढलते समय 
तुम भी तो खोलती हो 
सड़क की तरफ वाली खिड़की 
और देखती हो बेचैन नज़रों से 
सड़क की ओर 
और वह बांका छोरा
गर्दन घुमाये  देखता है तुम्हें 
मुस्कुराकर //

Wednesday, July 6, 2011

पूर्ण कविता

आज एक नई कविता का 
बीज बो रहा हूं 
इस बीज से -
जब अंकुर फूटेगा , तभी 
मेरी कविता की शुरुआत होगी 
फिर एक 
नन्हे पौधे के रूप में 
बाहर आएगी मेरी कविता 
और तब 
मैं उसे पानी और धूप दूंगा 
किन्तु --
जल्दी  के फेर में 
कोई रसायन नही डालूँगा 
क्योंकि रसायन 
मृदा की उर्वरकता को 
नष्ट कर देता है 
मेरी कविता का पौधा 
विशुद्ध होगा 
एक सुंदर छायेदार वृक्ष बनने तक 
मैं प्रतीक्षा करूँगा 
और जब उस वृक्ष को देखेने  और पढने  के लिए 
पाठक स्वम आयेंगे 
मेरी कविता पूर्ण होगी //

मेरा देश रोना चाहता है बहुत जोर से चीख़ कर

मान लीजिये कि कभी आप चीख़ कर रोना चाहते हैं किन्तु रो नहीं सकते ! कैसा लगता है तब ? तकलीफ़ होती है न ? मेरा देश रोना चाहता है बहुत जोर से ...