Friday, December 15, 2017

राजा की पसंद सर्वोपरि है

लाशों की मंडी पर
बैठा है लोकतंत्र
इनदिनों
पुलिस जानती है राजा की पसंद 
उसे पसंद है
नरमुंडों की घाटी
राजा की पसंद सर्वोपरि है !
यह राजाजी के शिकार खेलने का
वक्त है |

रचनाकाल :2016 

Monday, December 11, 2017

कुछ कविताएँ जो खो गई थीं



1.
किसान बोलता नहीं
शोषण की कहानी
कर लेता है ख़ुदकुशी
आदिवासी बोलते हैं
लड़ते हैं अपनी जमीन -जंगल के लिए
पुलिस मार देती है गोली
छात्र उठाये आवाज़ अपने हक़ के लिए
भर दिए जाते हैं जेल |
लोकतंत्र की किताब में
ये नये अध्याय हैं !
इन नये लिखे अध्यायों को बदलने के लिए
लड़ना तो होगा |

2.
वे चाहते थे कि
मैं भी उनकी भाषा में बोलूं
न बोल सकूं तो कम से कम उनकी भद्दी भाषा का समर्थन करूँ
हमसे हुआ नहीं ऐसा 
हम न उनकी भाषा में बोल सकें 
न ही उनका समर्थन कर सकें 
उन्हें आग लग गई 
उनके पास भी गौ रक्षकों की एक पोषित भीड़ है 
जो कभी भी 
कहीं भी किसी भी विरोधी की हत्या कर सकती है 
पीट कर न सही 
अपनी भद्दी भाषा में वे किसी की हत्या करने में सक्षम हैं 
मैंने अपना दरवाज़ा बंद कर दिया उनके लिए
उनके डर से नहीं
अपनी भाषा को बचाने के लिए
हम नहीं गा सकते जयगान
उन्होंने मुझे कुंठित कहा
गद्दार भी
जबकि हमने उनका नमक कभी नहीं खाया
सत्ता के कई रूप हैं
पहचानने का विवेक होना चाहिए।


3.
क्यों लिखूं कविता
इस बेशर्म वक्त पर
जब सब तलाश रहें हैं उम्मीद 
और उम्मीदें मजबूर हैं आत्महत्या को 
यदि आपको लगता है कि 
मैं गलत सोच रहा हूँ 
तो , बताइए कि क्यूँ बचा नहीं पाए हम अपने किसानों को मरने से 
क्यों भूख से मर गये सैकड़ों बच्चें 
लड़कियां क्यों डरी हुई हैं
चलिए आप यह बता दीजिए कि
किस पर भरोसा करें इस वक्त
जिन्हें चुनकर भेजा था हमने संसद और विधानसभा में
उनका मुखौटा उतर चुका है
ऐसे में आप मुझे बताइए कि
कविता लिख कर क्या करूँगा
कविता अब बाहर निकलना नहीं चाहती
बहुत सहमी हुई है
मेरी तरह ....

4.
तुम्हारे संघर्ष की कहानी में 
छिपी हुई है 
मेरी नई कविता 
करीब आओ तो 
पढ़ सकता हूँ उसे
मैं तुम्हारी आखों में।

5.
वो तमाम कमियाँ
बुराई और कमजोरियां
जो इन्सान में होती हैं
मुझमें भी है |
शायद
इसलिए
तुमसे करता हूँ
प्रेम !

6.

नि:शब्द है 
हमारा दर्द 
आओ,
आँखों से साझा करें इसे 
हम, एक -दूजे से

दिल्ली में बारिश और मध्य रात्रि

इस वक्त
जम कर बरस रहा है मेघ
जाने किस गम ने उसे सताया है
वह किस दर्द में चीख़ रहा है ?

गौर से सुनो
वो हमारी कहानी सुना रहा है |


Friday, December 8, 2017

सत्ता को मंजूर नहीं कोई सवाल

मौसम किस कदर बदला देखिये
हत्यारे को माफ़ी मिली
बेगुनाह को फांसी !
रुकी नहीं है अभी
सत्ता की हँसी !
टीवी रोज दिखाए हत्याओं की कहानी
हत्यारे को नहीं
बलात्कार हुआ सबको पता चला
बलात्कारी का चेहरा ढका है
कोई पूछे सवाल - क्यों ? 

मौसम किस कदर बदला देखिये
आग खुद करे अब जलन की बात
हत्यारा करने लगा है
हमारी सुरक्षा की बात
जबकि उसके हाथों में
खून के धब्बे बाकी है अभी तक
उसके जयकार के शोर में
भूख से रोते बच्चे की मौत हो जाती है हर रात
सिपाहियों की कदमों की आहट ने चीर दिया है
रात के सन्नाटे को
तुम्हें भ्रम है
तुम्हारी बस्तियां सुरक्षित है !

राजा अपने कक्ष से
लगातर हंस रहा है
सहमे हुए हमारे चेहरे देख कर
गूंगी प्रजा राजा की ताकत बन चुकी है
सत्ता को मंजूर नहीं कोई सवाल
राजा ने खुद को ईश्वर मान लिया है |

Thursday, December 7, 2017

हत्यारा इतना साहसी हो गया है

हत्यारा इतना साहसी हो गया है
कि वह ऐलान कर
हत्या कर रहा है अब
बतौर सबूत वह
हत्या का वीडियो बनाकर प्रसारित करता है !
सवाल है कि
उसे इतनी हिम्मत कहाँ से मिली कि
उसने सरेआम और फिर घर में घुसकर
दाभोलकर,
कलबुर्गी,पनसारे और लंकेश की हत्या की
उसने अकलाख, जुनैद और पहलू को मारा
फिर भी इस आधुनिक युग में पुलिस और अदालत को
क़ातिल का कोई सुराग नहीं मिला !
शासन ने ऐलान कर दिया
उसके रामराज्य में ऐसी कोई
वारदात नहीं हुई !


Tuesday, December 5, 2017

अपनी खोई हुई प्रेम कविताएं खोज रहा हूँ

मेरी कई प्रेम कविताएं
खो गई हैं
देखना यह है कि
अब कितना प्रेम बचा हुआ है
मुझमें 
उन कविताओं के बाहर !
नफ़रत के इस दौर में
आसान नहीं है प्रेम को बचाए रखना
इसलिए,
हमने उसे कविताओं में भर दिया था
अब जब कवियों की भी हत्या होने लगी है
कविता को कौन बचाएगा
अपने ही विराट महल में कैद हिंदुस्तान के अंतिम शहंशाह
बहादुर शाह ज़फर ने जब लिखा था -
"क्या गुनह क्या जुर्म क्या तक़्सीर मेरी क्या ख़ता
बन गया जो इस तरह हक़ में मिरे जल्लाद तू "
अब जब प्रेम पर पहरेदारी के लिए
तैयार हैं सरकारी दस्ते
मैं अपनी खोई हुई प्रेम कविताएं खोज रहा हूँ !

Friday, November 24, 2017

तुमसे मिलने की जो आखिरी चाह थी मेरी

अंतिम जंग से पहले 
तुमसे मिलने की 
जो आखिरी चाह थी मेरी 
तुमने, 
उसे समाप्त कर दिया 
अच्छा किया तुमने
जो मुझे पहचानने से
इंकार कर दिया
मौत का जो डर था दिल में
इस तरह ख़त्म कर दिया !

राजा की पसंद सर्वोपरि है

लाशों की मंडी पर बैठा है लोकतंत्र इनदिनों पुलिस जानती है राजा की पसंद  उसे पसंद है नरमुंडों की घाटी राजा की पसंद सर्वोपरि है ! यह ...